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जुर्माने के प्रावधान नरम करे सीआईएल

Source : Rajesh Bhagtani | Jun 23, 2012
 cilनई दिल्ली। कोयले की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने आज सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनी कोल इंडिया सीआईएल को बिजली कंपनियों के साथ आपूर्ति संबंधी नये करार मे जुर्माने के विवादास्पद प्रावधानों को नरम बनाने पर विचार करने लिए कहा। हालांकि मुआवजे के रूप में खनन कंपनी को कम आपूर्ति करने की अनुमति दी गई है, लेकिन घरेलू बिजली उद्योग ने फौरन इस कदम की आलोचना की है।

दरअसल, कोयले की आपूर्ति से संबंधित प्रतिबद्धता और पर्याप्त आपूर्ति न कर पाने की स्थिति में जुर्माने के मसलों पर सीआईएल औश्र इसके ग्राहकों के बीच मैदानी जंग छिडी हुई है। नये ईधन आपूर्ति करारों एफएसए के तहत जहंा सीआईएल ने पहले बिजली कंपनियों की जरूरत के 80 फीसदी कोयले की आपूर्ति करने पर सहमति जताई थी, वहीं कंपनी ने यह शर्त भी रख दी कि जितने कोयले की कम आपूर्ति होगी उसके मूल्य के 0.01 फीसदी जुर्माना दिया जाएगा। और एफएसए दस्तावेज में ऎसे जुर्माने पर तीन वर्षो के लिए रोक की व्यवस्था होगी। कुछ बिजली कंपनियों ने इस पर कडा ऎतराज जताया और उन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय से हस्तक्षेप करने की मांग उठाई। इस पूरे मामले से जुडे एक सूत्र ने कहा, बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि सीआईएल को पहले तीन वर्षो तक सालाना अनुबंधित मात्रा के 65 फीसदी, चौथे साल 72 फीसदी और पाचवें वर्ष 80 फीसदी कोयला आपूर्ति की अनुमति दी जाए। इसके अलावा सीआईएल को यह कहने पर भी गौर किया गया कि वह जुर्माना स्थगन संबंधी तीन वर्ष की अवधि खत्म करे और जुर्माने की रकम थोडा बढाए।

कोयला सचिव एस के श्रीवास्तव ने कहा कि इस मसले पर अंतिम निर्णय सीआईएल का निदेशक मंडल अपनी अगली बैठक में ले सकता है क्योंकि यह सार्वजनिक क्षेत्र का सूचीबद्ध उपक्रम है। बहरहाल, देश में कोयले की आपूर्ति में हो रही परेशानी पर बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पुलक चटर्जी ने की। इसमें श्रीवास्तव के साथ-साथ कोयला मंत्रालय के सलाहकार एवं पूर्व सचिव आलोक पेरती और सीआईएल के अध्यक्ष एस नरसिंह राव ने भी हिस्सा लिया। लेकिन आज के फैसले पर बिजली उद्योग ने नारााजगी जताते हुए कहा कि इसके गंभीर नतीजे हो सकते है। बिजली कंपनियों के संगठन एपीपी के निदेशक अशोक खुराना ने कहा, आश्वासन पत्र के तहत 85 फीसदी आपूर्ति की प्रतिबद्धता की जगह 65 फीसदी की आपूर्ति पर बिजली संयंत्रों का लोड फैक्टर 55 फीसदी रह जाएगा, जो 85 फीसदी मानक उपलब्धता कारक से बहुत कम होगा। यदि इस उपाय के साथ आपूर्ति में कमी को पाटने के लिए थोक आयात को नहीं जोडा जाता है तो नतीजे में कीमत वृद्धि और टैरिफ संशोधन होगा, जो क्षेत्र के लिए घातक साबित होगा।

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