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रूपए के लुढकने से खाद्य तेल की कीमतों में तेजी

Source : Rajesh Bhagtani | Jun 22, 2012
 cooking oilअहमदाबाद। कच्चे तेल और रूपयों की हलचल ने तेल बाजारों को हिला दिया। कच्चा तेल और रूपयों की कीमत लगातार गिरती जा रही है। खबर यह है कि रूपए अब तक के सबसे निचले स्तर 57.5 के पास पहुंच गया है।

तलों की कीमते पिछले सप्ताह से अब तक 57 फीसदी बढ चुकी है। मजबूत वैश्विक रूझान, कमजोर रूपये और देश में मॉनसून आने में हो रही देरी की वजह से खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी बनी हुई है। पॉम तेल, सरसों तेल, बिनौला तेल और सोया तेल सहित प्रमुख खाद्य तेलों की कीमतें पिछले एक सप्ताह में 57 फीसदी बढ़ चुकी हैं। उद्योग के विशेषज्ञों ने खाद्य तेलों में अचानक तेजी के लिए वैश्विक रूझानों, मुद्रा में कमजोरी और देश में मॉनसून में देरी को बताया है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से मानसून का आगे बढना रूका हुआ है। वैश्विक और घरेलू बाजार दोनों में खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार गिरावट जारी थी। लेकिन अब भारत में मानसून में देरी और मजबूत वैश्विक रूझान से धारणा मजबूत बनने लगी है। इसलिए कीमतों में तेजी दिखाई दे रही है। पिछले एक सप्ताह में कीमतें 5-7 फीसदी बढ चुकी हैं। गुरूवार को आरबीडी पामोलिन का कारोबार 601 रूपये प्रति 10 किलोग्राम पर हुआ, जबकि मूंगफली तेल की कीमतें 1,190 रूपये प्रति 10 किलोग्राम है। सरसों रिफाइंड का भाव 812 रूपये प्रति 10 किलोग्राम और बिनौला तेल 690 रूपये के आसपास बना हुआ है। सोयाबीन रिफाइंड तेल की कीमत गुरूवार को 715 रूपये प्रति 10 किलोग्राम रही। रूपए के इंट्रा डे में डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड गिरावट के साथ 56.70 रूपये के स्तर पर पहुंचने से खाद्य तेल का आयात और महंगा हो गया है। मेहता ने कहा कि रूपए की गिरावट घरेलू बाजार में कीमतों को बढाएगी।

यह पहले इसलिए महसूस नहीं हुआ क्योंकि कमजोर सेंटीमेट की वजह से वैश्विक स्तर पर खाद्य तेल की कीमतें नीचे थीं। लेकिन अब वैश्विक कीमतें मजबूत हो चुकी हैं, जबकि रूपया और गिरे जा रहा है। इससे घरेलू बाजार में कीमतें बढेगी। एसईए के आंक़डों के मुताबिक तेल वर्ष (नवंबर 2011 से अप्रैल 2012) की पहली छमाही के दौरान खाद्य तेलों का आयात 30 फीसदी बढा है। इस दौरान कुल आयात 47.1 लाख टन दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की समान अवधि में 36 लाख टन था। कनेरिया ऑयल मिल्स के एमडी सुरेश कनेरिया ने कहा, अमेरिका में मौसमी स्थितियां सोयाबीन के अनुकूल नहीं हैं, जबकि चीन ने अपनी तेल खरीद बढा दी है।

साथ ही हमारा मानना है कि निकट आ रहे रमजान के त्यौहारी सीजन की वजह से मांग में इजाफा होगा। लघु अवधि में खाद्य तेल की कीमतें 8-10 फीसदी बढ सकती हैं। मलेशियाई कच्चे पाम तेल की कीमतें 1 जून के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। मलेशिया डेरिवेटिव्ज एक्सचेंज पर बेंचमार्क सितंबर पाम तेल वायदा अनुबंध 3.2 फीसदी चढ़कर 3,041 रिंगिट (करीब 964 डॉलर) प्रति टन पर बंद हुआ। इस महीने के दौरान कच्चे पाम तेल की कीमतें अब तक 15 फीसदी बढ चुकी हैं। उद्योग के एक स्त्रोत ने कहा कि हालांकि मंूगफली की कीमतों में कुछ गिरावट आ सकती है, क्योंकि मांग कम है और उपलब्धता बढ रही है। अगर विदेशी मांग नहीं निकली तो इसकी कीमत अगले 15 से 20 दिन में गिरकर 1,950 रूपये प्रति 15 किलोग्राम पर आ सकती हैं।

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