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अमेरिका-इजरायल के ईरान पर 'बड़े सैन्य अभियान' के बाद वैश्विक तेल कीमतों में उछाल की संभावना

Source : business.khaskhabar.com | Feb 28, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 global oil prices likely to surge following us israeli major military operation against iran 795348नई दिल्ली । अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए 'बड़े सैन्य अभियान' के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेजी आने की संभावना है। इस संघर्ष से होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज) युद्ध क्षेत्र में आ सकता है, जिससे मध्य पूर्व देशों से कच्चे तेल के निर्यात में बाधा आ सकती है। 
दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए भेजा जाता है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। भारी मिसाइल हमलों और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की नौसेना को खत्म करना सैन्य अभियान का अहम उद्देश्य बताए जाने के बाद इस क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल के बड़े पैमाने पर समन्वित हमले और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद भू-राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। ऐसे में 'वार प्रीमियम' के कारण तेल कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
शुक्रवार को कारोबार बंद होने तक तेल कीमतें 2 प्रतिशत बढ़कर बंद हुईं और ब्रेंट क्रूड 72.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण हुई।
बार्कलेज बैंक ने कहा है कि अगर आपूर्ति में बड़ा व्यवधान होता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। हालांकि बैंक ने यह भी कहा कि तनाव बढ़ने का मतलब यह नहीं कि तुरंत आपूर्ति रुक जाएगी, लेकिन बाजार में जोखिम प्रीमियम जुड़ गया है।
इस बीच, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में खाड़ी देशों से बाहर के देशों से तेल आयात बढ़ाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत की है। अब बड़ी मात्रा में तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नहीं आता।
उन्होंने कहा कि देश की तेल विपणन कंपनियों (इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम) के पास कई हफ्तों का भंडार है और विभिन्न मार्गों से आपूर्ति जारी है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। तेल कीमतों में तेजी से आयात बिल बढ़ता है और महंगाई की दर बढ़ जाती है, जो आर्थिक विकास को नुकसान पहुंचाती है।
हालांकि, भारत ने अमेरिका और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों से आयात बढ़ाकर तेल स्रोतों में विविधता लाई है और रणनीतिक कच्चे तेल भंडार बनाकर अपनी स्थिति मजबूत की है। भारत के पास पुदुर में 2.25 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) भंडारण क्षमता है, जबकि विशाखापत्तनम में 1.33 एमएमटी और मंगलौर में 1.5 एमएमटी कच्चे तेल भंडारण की क्षमता है। इसके अलावा, समुद्र तट पर स्थित चांदीखोल में एक और रणनीतिक भंडार सुविधा का निर्माण किया जा रहा है।
आपात स्थिति में देश इन रणनीतिक तेल भंडारों का उपयोग कर सकता है। जब वैश्विक कीमतें बहुत अधिक बढ़ जाती हैं, तब भी इन भंडारों का सहारा लेकर राष्ट्रीय तेल कंपनियों को राहत दी जा सकती है।
--आईएएनएस
 

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