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देशभर में एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाने की तैयारी, एफएसएसएआई ने दिया प्रस्ताव

Source : business.khaskhabar.com | Sep 24, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 fssai proposes banning the sale and production of analog cheese across the country 847541
बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने देशभर में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। खाद्य नियामक ने इस संबंध में मसौदा संशोधन जारी करते हुए सार्वजनिक और उद्योग जगत से सुझाव मांगे हैं। 

एफएसएसएआई के मसौदे के अनुसार, यह संशोधन इसलिए प्रस्तावित किया गया है ताकि एनालॉग उत्पादों को पनीर के रूप में बेचने पर रोक लगाई जा सके और उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और संरचना को लेकर भ्रमित होने से बचाया जा सके। 

नियामक का कहना है कि कई मामलों में गैर-डेयरी सामग्री से बने उत्पादों को पनीर के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे उपभोक्ता गुमराह होते हैं। प्रस्तावित नियमों के तहत, जो उत्पाद वर्तमान में 'डेयरी के संदर्भ में एनालॉग' श्रेणी के अंतर्गत लाइसेंस या पंजीकरण प्राप्त कर चुके हैं, उन्हें अपने नाम, लेबलिंग और विपणन सामग्री में 'पनीर' शब्द का उपयोग बंद करना होगा। 

एफएसएसएआई ने इस उद्देश्य से फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (बिक्री पर प्रतिबंध और प्रतिबंधात्मक प्रावधान) विनियमों में संशोधन का मसौदा जारी किया है। अधिसूचना के अनुसार, इसे आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के 60 दिन बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए अंतिम रूप दिया जाएगा। हाल के वर्षों में कई राज्य सरकारों ने भी एनालॉग पनीर की बिक्री और निर्माण पर कार्रवाई की है। 

खाद्य नियामक ने कई खाद्य कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और गुणवत्ता संबंधी अनियमितताएं पाए जाने पर लाइसेंस निलंबित किए हैं तथा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। हाल ही में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए एक वर्ष के लिए कृत्रिम या एनालॉग पनीर के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। 

यह कदम उस समय उठाया गया जब राज्य में जांचे गए पनीर के 35 प्रतिशत से अधिक नमूने गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाए गए थे। जांच में वनस्पति वसा की मिलावट जैसी अनियमितताएं सामने आई थीं। इसी तरह गुजरात सरकार ने भी पूरे राज्य में गैर-मानक एनालॉग पनीर, चीज और बटर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। 

राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को भ्रमित किए जाने, खाद्य सुरक्षा पर खतरे और डेयरी क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंकाओं को इसका कारण बताया था। नियामक के अनुसार, वनस्पति तेल और अन्य गैर-डेयरी सामग्री से बने कुछ उत्पादों को पनीर के रूप में बेचा जा रहा था, जिससे न केवल उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा था, बल्कि असली डेयरी उत्पादकों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा था और खाद्य सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो रहे थे। -आईएएनएस

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