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भारतीय शेयर बाजार सपाट खुला, कच्चे तेल के 100 डॉलर के पार जाने से ऑटो और कंज्यूमर स्टॉक्स पर दबाव

Source : business.khaskhabar.com | Sep 10, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 indian stock market opened flat with crude oil crossing $100 putting pressure on auto and consumer stocks 843532मुंबई । भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबारी सत्र में करीब सपाट खुला। सुबह 9:23 पर सेंसेक्स 36 अंक या 0.05 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74,727.96 और निफ्टी 8.25 अंक या 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,430.00 पर था।  
शुरुआती कारोबार में बाजार में दबाव ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स स्टॉक्स पर देखा जा रहा है। सूचकांकों में निफ्टी ऑटो और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स टॉप लूजर्स थे। इसके बाद निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी फार्मा, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी इन्फ्रा और निफ्टी मेटल लाल निशान में थे। 
दूसरी तरफ निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी एनर्जी हरे निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 114 अंक या 0.18 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,479 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 18 अंक की मामूली तेजी के साथ 20,055 पर था। 
ज्यादातर वैश्विक बाजारों में कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार बुधवार को लाल निशान में बंद हुए थे, जिसमें डाओ जोन्स 0.77 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। 
जानकारों ने कहा कि निफ्टी के 23,500 के रेजिस्टेंस लेवल से नीचे आने के कारण मार्केट की स्थिति कमजोर हो गई है। तकनीकी रूप से मार्केट में और गिरावट की आशंका है, और बुनियादी मैक्रो ट्रेंड्स भी बिगड़ते जा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 101 डॉलर प्रति के पार चली गई है और यूएस के 10-साल के बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 4.83 प्रतिशत हो गई है। इससे फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है, जिससे मार्केट में चिंताएं भी बढ़ रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भले ही भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अच्छी स्थिति में है और चालू खाता घाटा भी नियंत्रण में है, लेकिन अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती हैं, तो इसका असर इस साल भारत की जीडीपी ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर भी पड़ेगा।
--आईएएनएस 

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