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आईएमईसी कॉरिडोर और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से खुलेगा वैश्विक व्यापार का नया रास्ता, भारत बनेगा बड़ा ट्रांसशिपमेंट और निर्यात केंद्र: विशेषज्ञ

Source : business.khaskhabar.com | Aug 25, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 the imec corridor and robust infrastructure will open new avenues for global trade and india will become a major transshipment and export hub experts 839259नई दिल्ली । भारत को वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार तेजी से काम कर रही है। उद्योग जगत, नीति विशेषज्ञों और व्यापार संगठनों ने सोमवार को कहा कि आधुनिक बंदरगाहों, बेहतर सड़क एवं रेल नेटवर्क और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) जैसी परियोजनाएं देश के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी। साथ ही, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार, अनुपालन संबंधी बोझ में कमी और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाले कदम भारत की आर्थिक प्रगति को और गति देंगे। 
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हाई-वे, रोड-वे, वॉटर-वे और अन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि बंदरगाह अब व्यापार और लॉजिस्टिक्स की रीढ़ बन चुके हैं, जिससे माल की आवाजाही का समय कम हुआ है और वेयरहाउसिंग सुविधाओं के जरिए सामान तेजी से व्यापारियों तक पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा, "आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स का समय और कम होगा क्योंकि सरकार लगातार सुधार लागू कर रही है। व्यापारियों के लिए 40,000 से अधिक अनुपालनों को समाप्त किया गया है और 'जन विश्वास विधेयक' के जरिए लगभग 1,000 ऐसे प्रावधान खत्म किए गए हैं, जिनके चलते कारोबारियों को अनावश्यक उत्पीड़न या जेल जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता था।"
सिंघी ने विश्वास जताया कि भारत तेजी से निर्यात क्षमता बढ़ा रहा है और भविष्य में दुनिया के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय व्यापारियों से लेकर निर्यातकों तक सामान पहुंचाने की पूरी प्रणाली पहले से अधिक मजबूत और प्रभावी होती जा रही है।
वहीं, 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के नेशनल प्रोग्राम डायरेक्टर और एनएचईवी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभिजीत सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि आईएमईसी कॉरिडोर भारत को ट्रांसशिपमेंट हब बनाने की प्रधानमंत्री मोदी की सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने कहा, "दुनिया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है और भारत के पूर्वी तथा पश्चिमी तट इसमें निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं। जब यह कॉरिडोर दुबई के रास्ते यूरोप तक पहुंचेगा और कांडला, जेएनपीए तथा मुंद्रा जैसे प्रमुख भारतीय बंदरगाह जेबेल अली और अबू धाबी पोर्ट से जुड़ेंगे, तब भारत की ट्रांसशिपमेंट क्षमता और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाएगा।"
अभिजीत सिंह ने आगे कहा कि वर्तमान में भारत-मध्य पूर्व क्षेत्र में मौजूद कुछ भू-राजनीतिक चुनौतियों का समाधान कूटनीतिक स्तर पर किया जाना आवश्यक है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आईएमईसी का जो हिस्सा पहले से विकसित हो चुका है, उसे जल्द संचालित कर आगे और मजबूत बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बढ़ते वैश्विक व्यापार और माल ढुलाई की मांग को देखते हुए भारत के लिए आधुनिक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित करना बेहद जरूरी है। अब तक इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा श्रीलंका के पास रहा है, लेकिन भारत तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
वहीं, इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) की प्रोफेसर डॉ. सौमेन रॉय ने आईएएनएस से कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के निर्यात प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।
उन्होंने कहा, "यदि पिछले छह महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत के निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। भारत अब चीन जैसे बाजारों में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात कर रहा है, जबकि सिंगापुर और अन्य देशों में भी भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।"
डॉ. रॉय ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों, बढ़ते टैरिफ और वैश्विक व्यापारिक बाधाओं के बावजूद भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जो देश की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
इसके साथ ही, नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि भारत की भविष्य की वृद्धि का सबसे बड़ा आधार डीप-टेक स्टार्टअप्स बनने वाले हैं।
उन्होंने कहा, "पिछले कई दशकों से हम छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए ऋण उपलब्धता की चर्चा करते आ रहे हैं। लेकिन भविष्य की असली कुंजी डीप-टेक स्टार्टअप्स में है। मैं खुद कई ऐसे स्टार्टअप्स से मिला हूं जो नई तकनीकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं। यही कंपनियां भविष्य में भारत को वैश्विक नवाचार शक्ति बना सकती हैं।"
विरमानी ने आगे कहा कि भारत के विकास की अगली कहानी केवल परंपरागत उद्योगों से नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और उन्नत स्टार्टअप्स से लिखी जाएगी।
--आईएएनएस

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