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चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी, घरेलू मांग में गिरावट से विकास पर असर

Source : business.khaskhabar.com | July 26, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 china economy slows with declining domestic demand impacting growth 831745बिजनेस डेस्क। नई दिल्ली 
घरेलू मांग में लगातार गिरावट के कारण इस वर्ष की दूसरी तिमाही में चीन की जीडीपी वृद्धि दर घटकर महज 4.3 प्रतिशत रह गई। यह निर्यात पर अत्यधिक निर्भर चीनी अर्थव्यवस्था में गहराते संरचनात्मक असंतुलन को दर्शाता है। 
मर्केटर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज (एमईआरआईसीएस) के एक आर्टिकल के अनुसार, जीडीपी वृद्धि को सबसे अधिक प्रभावित करने वाला प्रमुख कारण स्थिर परिसंपत्ति निवेश (एफएआई) में तेज गिरावट रही। रियल एस्टेट निवेश 18 प्रतिशत घट गया, जो किसी भी छह महीने की अवधि में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। 

इसके अलावा सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और निर्माण क्षेत्र में भी एफएआई में कमी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रही स्थानीय सरकारों के पास बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर खर्च करने के लिए धन लगभग समाप्त हो चुका है। 

आर्टिकल में आगे कहा गया है कि चीन की अर्थव्यवस्था में मौजूद संरचनात्मक असंतुलन और गहरा होता जा रहा है। जून में घरेलू कारों की बिक्री सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत गिर गई, जो उपभोक्ता विश्वास में कमजोरी को दर्शाती है और समग्र आर्थिक वृद्धि को भी प्रभावित कर रही है। हालांकि चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था सुस्ती का सामना कर रही है, लेकिन उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार अभी भी मजबूत बना हुआ है। 
जून में निर्यात मूल्य के आधार पर 27 प्रतिशत और आयात 36 प्रतिशत बढ़ा। विशेष रूप से हाई-टेक उत्पादों का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिससे संकेत मिलता है कि चीन के निर्यात में वृद्धि की अभी भी संभावनाएं हैं। 

आर्टिकल के मुताबिक, चीन में संरचनात्मक असंतुलन बढ़ने और निर्यात के लगातार विस्तार के कारण यूरोपीय संघ (ईयू) और चीन के बीच व्यापारिक तनाव आगे भी ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है। 

रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात की मात्रा बढ़ी है, लेकिन आयात की मात्रा लगभग स्थिर बनी हुई है। चीन पहले की तुलना में अधिक सामान आयात नहीं कर रहा, बल्कि कमोडिटी और हाई-टेक उत्पादों की बढ़ती कीमतों के कारण उन्हीं वस्तुओं के लिए अधिक भुगतान कर रहा है। 

चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर इतनी अधिक निर्भर हो चुकी है कि यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ताओं में उसके रुख में नरमी आने की संभावना बेहद कम है। यूरोप में चीनी वस्तुओं की बढ़ती आमद ने यूरोपीय संघ को अपने व्यापार सुरक्षा तंत्र की समीक्षा करने के लिए प्रेरित किया है। यहां तक कि जर्मनी की सरकार ने भी बीजिंग की औद्योगिक नीतियों से पैदा हुई बाजार विकृतियों पर पहले की तुलना में अधिक खुलकर आलोचना शुरू कर दी है। 

आर्टिकल के मुताबिक, व्यापार और निवेश पर बातचीत के दौरान यूरोपीय नीति-निर्माताओं को बीजिंग से किसी बड़ी रियायत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। घरेलू आर्थिक दबावों के चलते चीन अपने रुख पर पहले की तरह अडिग रह सकता है। 

आर्टिकल में कहा गया है कि निर्यात में तेजी के बावजूद व्यापक आर्थिक सुस्ती से बचने और अपने विकास लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीजिंग को कम से कम उपभोग और निवेश में मध्यम स्तर की वृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। हालांकि उपभोग बढ़ाने के लिए ठोस कदम फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। 

घरेलू खर्च बढ़ाने की बीजिंग की प्रतिबद्धता एक दीर्घकालिक लक्ष्य है, जिसके लिए कठिन संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता होगी। ऐसे सुधार लागू होने के बाद भी उनका असर दिखने में कई वर्ष लग सकते हैं। -आईएएनएस

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