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चिप उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मटेरियल इकोसिस्टम विकसित करना होगा, तकनीकी संप्रभुता की राह में यही सबसे बड़ी चुनौती : अश्विनी वैष्णव

Source : business.khaskhabar.com | Oct 14, 2026 | businesskhaskhabar.com Gadget News Rss Feeds
 developing a critical materials ecosystem for the chip industry is essential it is the biggest challenge on the path to technological sovereignty ashwini vaishnaw 853031नई दिल्ली । केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि तकनीकी संप्रभुता की दिशा में भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण सामग्रियों (क्रिटिकल मटेरियल्स) पर निर्भरता सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक बनी हुई है। 
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए मंत्री ने सेमीकंडक्टर और अन्य उन्नत प्रौद्योगिकियों के लिए जरूरी सामग्रियों में घरेलू क्षमताओं को तेजी से विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण सामग्रियों की वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का कुछ सीमित देशों में केंद्रित होना, भारत के एक विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और विनिर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के सामने बड़ी चुनौती है।
उन्होंने केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अन्य इनपुट्स को ऐसे प्रमुख क्षेत्र बताया, जहां भारत को घरेलू विशेषज्ञता और उत्पादन क्षमताओं को मजबूत करना होगा।
वैष्णव ने कहा कि जो देश आज मटेरियल इकोसिस्टम पर प्रभुत्व रखते हैं, उन्होंने इन क्षमताओं को विकसित करने में दशकों लगाए हैं। हालांकि भारत के पास इतनी लंबी समयसीमा का इंतजार करने की सुविधा नहीं है और उसे विनिर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण तथा महत्वपूर्ण सामग्रियों के प्रबंधन में विशेषज्ञता विकसित करने के प्रयासों को तेज करना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल चिप निर्माण और असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मटेरियल्स, केमिकल्स, गैसों और सब्सट्रेट्स को शामिल करते हुए एक व्यापक इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मंत्री ने आगे बताया कि देश के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण में इन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति तैयार उत्पादों की असेंबली से आगे बढ़कर मॉड्यूल, कंपोनेंट्स, मटेरियल्स और अंततः पूंजीगत उपकरणों के निर्माण तक पहुंचने की है। उन्होंने बताया कि विनिर्माण क्षेत्र में स्थायी विकास के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण जरूरी है।
वैष्णव ने स्पष्ट किया कि तकनीकी संप्रभुता हासिल करने का भारत का प्रयास अन्य देशों पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त करने के लिए नहीं है, बल्कि रणनीतिक कमजोरियों को दूर करने और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूती विकसित करने के लिए है।
उन्होंने कहा, "जब हम तकनीकी संप्रभुता की बात करते हैं तो हमें इसे बहुत परिपक्व और जटिल तरीके से देखना होगा। हम रणनीतिक निर्भरता और लचीलापन बढ़ाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। ऐसे कौन से उत्पाद और क्षेत्र हैं जिनमें हमारे देश के भीतर विनिर्माण, डिजाइन और संपूर्ण उत्पाद विकास क्षमताएं होनी चाहिए? वहीं, वैल्यू चेन के किन हिस्सों में हम अन्य देशों पर निर्भर रह सकते हैं? प्रौद्योगिकी हमेशा एक वैश्विक वैल्यू चेन का हिस्सा होती है।"
उन्होंने आगे कहा, "हम जिस भी क्षेत्र में काम करना चाहते हैं या प्रवेश कर रहे हैं, उसमें एक विश्वसनीय भागीदार बनना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, 28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर के लेगेसी नोड्स में एक मिलियन डॉलर की मशीन का उत्पादन सिर्फ एक डॉलर की चिप के कारण रुक सकता है। ऐसे में क्या हम खुद को डिजाइन, विनिर्माण और अंतिम उत्पाद के पूर्ण मूल्यांकन में एक विश्वसनीय देश के रूप में स्थापित कर सकते हैं? हम इसी दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहे हैं।"
--आईएएनएस
 

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