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भारत-जापान स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स में बढ़ाएंगे सहयोग: निर्मला सीतारमण

Source : business.khaskhabar.com | Oct 16, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india and japan to enhance cooperation in clean energy semiconductors and critical minerals nirmala sitharaman 853722बैंकॉक । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को यहां विश्व बैंक-आईएमएफ की वार्षिक बैठकों के इतर जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के गवर्नर काजुहिको अमाकावा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) के क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने पर चर्चा की। 
वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि बैठक के दौरान स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा परिवर्तन, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और मजबूत आपूर्ति शृंखलाओं में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा में 60 करोड़ डॉलर के भारत-जापान फंड और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (एनआईआईएफ) में जापानी भागीदारी का भी उल्लेख किया गया।
बैठक के दौरान काजुहिको अमाकावा ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बायोएथेनॉल क्षेत्रों में भारत-जापान फंड की सफलता का जिक्र किया और भविष्य में एक नए फंड की उम्मीद भी जताई।
उन्होंने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (एनआईसीडीसी) में जेबीआईसी की हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि जापानी कंपनियों की सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रुचि लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विशेष रूप से धोलेरा में अवसरों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा सेंटर क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर जोर दिया।
वित्त मंत्री ने जापानी कंपनियों को विशाखापत्तनम जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए निवेश बढ़ाने का आग्रह किया, ताकि संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा मिल सके।
दोनों पक्षों ने माना कि भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग को और गहरा करने तथा एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
इससे पहले दिन में निर्मला सीतारमण ने विश्व बैंक-आईएमएफ की वार्षिक बैठकों के इतर आयोजित कार्यक्रम में "वर्किंग टुगेदर टू मेक सिटीज इन्वेस्टेबल - मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल फॉर अर्बन एंड वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर" विषय पर मुख्य वक्तव्य दिया, जिसमें उन्होंने भारत के महत्वाकांक्षी शहरी विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में वित्त मंत्री ने कहा कि मध्यम आय वर्ग वाले कई देश अचानक भुगतान संतुलन (बैलेंस ऑफ पेमेंट्स) के गंभीर संकट में फंस जाते हैं और उन्हें आईएमएफ की सहायता की जरूरत पड़ती है।
उन्होंने कहा, "ऐसी स्थितियों में प्रतिक्रिया कई वर्षों बाद नहीं आनी चाहिए। देश मजबूरी में सहायता मांगते हैं, लेकिन तीन-चार वर्षों तक भी कोई समाधान नहीं मिलता।"
सीतारमण ने कहा कि अब इस प्रकार की कमियों को दूर करने की दिशा में सुधार किए जा रहे हैं।
--आईएएनएस 

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