जयपुर कमोडिटी मार्केट : कोटा घटने से चीनी की कीमतों में ₹100 का उछाल, सुस्त मांग के बीच गुड़ के भाव स्थिर
Source : business.khaskhabar.com | Jun 30, 2026 | 

बिजनेस डेस्क। जयपुर स्थानीय सूरजपोल थोक अनाज व कमोडिटी मंडी में मिठास के बाजार का रुख मिला-जुला देखा जा रहा है। घरेलू बाजार में आपूर्ति (कोटा) कम होने के कारण चीनी के दामों में ₹100 प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, भीषण गर्मी के चलते उपभोक्ता मांग कमजोर होने से गुड़ के भावों में स्थिरता बनी हुई है और इनमें कोई उल्लेखनीय फेरबदल देखने को नहीं मिला है।
कोटा कम होने से चीनी के तेवर कड़ेः सूरजपोल मंडी के व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, मिलों से आपूर्ति का कोटा कम आने के कारण हाजिर बाजार में मंगलवार को चीनी की कीमतों को तगड़ा सपोर्ट मिला। बाजार में इसके भाव ₹100 प्रति क्विंटल उछलकर ₹4450 से ₹4700 प्रति क्विंटल के स्तर पर मजबूत बोले जा रहे थे। थोक कारोबारियों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में भी मिलों से सप्लाई की स्थिति ऐसी ही सीमित रही, तो चीनी के भावों में और अधिक मजबूती देखने को मिल सकती है।
गर्मी ने रोकी गुड़ की रफ्तार, भाव जस के तसः महालक्ष्मी एंड कंपनी के वरिष्ठ कमोडिटी विशेषज्ञ मुरारीलाल अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में भीषण गर्मी और उमस के कारण आम उपभोक्ताओं और हलवाइयों की तरफ से गुड़ की पारंपरिक मांग काफी कमजोर बनी हुई है। मांग की इसी सुस्ती के चलते थोक बाजार में गुड़ के विभिन्न ब्रांड्स और वैरायटी के भाव पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं।
मंडी में वर्तमान व्यापारिक भाव (प्रति क्विंटल) इस प्रकार दर्ज किए गए: गुड़ पेडी: ₹5150 से ₹5250
रसकट: ₹5000 से ₹5100
लड्डू गुड़: ₹5150 से ₹5400
ढैया गुड़: ₹5250 से ₹5500
मानसून और ऑर्गेनिक ट्रेंड पर टिकी नजरेंः बाजार जानकारों का कहना है कि भले ही वर्तमान में गुड़ की मांग कमजोर है, लेकिन मानसून की अनिश्चितता और चीनी की कीमतों में आ रहे इस संभावित उछाल से आने वाले दिनों में गुड़ के भावों को भी अच्छा सपोर्ट मिल सकता है।
इस बीच, बाजार में एक नया ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक (हेल्थ कॉन्शियस) उपभोक्ताओं के बीच प्रीमियम और ऑर्गेनिक पैकेज्ड गुड़ की मांग लगातार बढ़ रही है। लोग अब चीनी के एक सेहतमंद विकल्प के रूप में इसे अपनी रसोई में जगह दे रहे हैं।
व्यापारिक अनुमानों के अनुसार, मुजफ्फरनगर और उत्तर भारत की अन्य प्रमुख उत्पादक मंडियों में नए गुड़ की आवक सितंबर-अक्टूबर के दौरान शुरू होगी, तब तक बाजार इसी दायरे में घूमता नजर आएगा।
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[@ यह बच्चा धीरे धीरे बनता जा रहा है पत्थर!]
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