MSP से 1000 रुपए ऊपर पहुंचे सरसों के दाम, फिर भी मिलर्स और किसानों की बढ़ी चिंता
Source : business.khaskhabar.com | Feb 09, 2026 | 
जयपुर। राजस्थान सहित देश की प्रमुख मंडियों में सरसों की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। जयपुर मंडी में सोमवार को सरसों मिल डिलीवरी (42% तेल कंडीशन) के भाव में 100 रुपए प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद भाव 7250 रुपए के स्तर पर आ गए हैं। हालांकि, ध्यान देने योग्य बात यह है कि बाजार में मंदी के बावजूद वर्तमान कीमतें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 6200 रुपए से लगभग 1000 रुपए प्रति क्विंटल अधिक बनी हुई हैं।
वायदा कारोबार बहाली की उठ रही मांगः सरसों के वायदा कारोबार पर लगी रोक के बीच अब व्यापारिक संगठनों और विशेषज्ञों ने इसे पुनः शुरू करने की पुरजोर सिफारिश की है। नाबार्ड जैसे संस्थानों का भी मानना है कि वायदा एवं विकल्प बाजार न केवल जोखिम प्रबंधन का सशक्त माध्यम हैं, बल्कि ये किसानों को उनकी उपज का किफायती और लाभकारी मूल्य दिलाने में भी सहायक सिद्ध होते हैं।
मांग और आपूर्ति का बड़ा अंतरः बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में खाद्य तेलों का घरेलू उत्पादन 110 से 115 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि देश की कुल खपत या मांग 265 लाख टन के करीब पहुंच सकती है। मांग और आपूर्ति के बीच का यह भारी अंतर कीमतों में भारी अस्थिरता (Volatility) पैदा करता है।
मिलर्स के सामने जोखिम प्रबंधन की चुनौतीः वर्तमान में वायदा बाजार बंद होने के कारण छोटे मिलर्स और व्यापारियों के पास कीमतों में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव से बचने के लिए 'हेजिंग' का कोई विकल्प नहीं है। नतीजतन, अधिकांश मिलर्स भारी वित्तीय जोखिम उठाकर व्यापार करने को मजबूर हैं। वहीं, कुछ बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां अपने जोखिम को कम करने के लिए विदेशी प्लेटफॉर्म्स का सहारा ले रही हैं, जो घरेलू छोटे उद्योगों के लिए संभव नहीं है।
जानकारों का मानना है कि यदि सरकार को वर्तमान वायदा ढांचे से कोई तकनीकी समस्या है, तो उसमें आवश्यक सुधार कर इसे तत्काल प्रभाव से शुरू करना चाहिए। इससे न केवल बाजार में पारदर्शिता आएगी, बल्कि किसानों और उद्योग जगत को अनिश्चितता से मुक्ति मिलेगी।
[@ व्यायाम से डर लगे तो कॉफी पीएं]
[@ नानी ने दिया नातिन को जन्म! जानिए,कैसे हुआ ये]
[@ इस अभिनेत्री को पांच बार किया प्रपोज]