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भारत-ईएफटीए समझौते से नॉर्वे के निवेशकों के लिए खुले नए अवसर, मैन्युफैक्चरिंग से ग्रीन एनर्जी तक बढ़ेगा सहयोग

Source : business.khaskhabar.com | Oct 19, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 new opportunities open for norwegian investors via india efta agreement cooperation to expand from manufacturing to green energy 854258
नई दिल्ली । भारत की मजबूत आर्थिक विकास दर और भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) नॉर्वे के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहा है। उद्योग जगत के आकलनों के अनुसार, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 
ईवाई इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2030 तक औसतन 6.5 प्रतिशत के आसपास बनी रहने का अनुमान है। इसी के साथ यह उम्मीद जताई जा रही है कि दशक के अंत तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, बढ़ते निवेश, तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुधार इस वृद्धि के प्रमुख आधार हैं।
अक्टूबर 2025 से लागू भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते को भारत और नॉर्वे के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
यह समझौता व्यापार उदारीकरण को बढ़ावा देने, निवेश प्रवाह को आसान बनाने और नवाचार, स्थिरता तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
समझौते के तहत 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है। साथ ही इससे भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जो विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भारत की स्थिति मजबूत करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता नॉर्वे की तकनीकी विशेषज्ञता, स्थिरता-केंद्रित दृष्टिकोण और पूंजी-गहन उद्योगों की क्षमता को भारत के विशाल बाजार और विकास महत्वाकांक्षाओं के साथ जोड़ने का मजबूत अवसर प्रदान करता है।
सहयोग के लिए जिन प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है, उनमें विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, तेल एवं गैस, समुद्री सेवाएं, समुद्री खाद्य प्रसंस्करण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), फिनटेक और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। टीईपीए के तहत बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग से इन क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल भुगतान प्रणाली भी नॉर्वे की कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रही है। इससे उन्हें दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजारों में से एक तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से भारत द्वारा उठाए गए नीतिगत कदम भी दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं। इससे भारत और नॉर्वे के बीच आर्थिक सहयोग के और मजबूत होने की संभावना है।
--आईएएनएस

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