businesskhaskhabar.com

Business News

Home >> Business

रुपए में स्थिरता, कोरियाई और ताइवानी बाजार में उतार-चढ़ाव से भारत में हो सकती है विदेशी निवेशकों की वापसी

Source : business.khaskhabar.com | Jun 28, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 stability in the rupee volatility in the korean and taiwanese markets may lead to return of foreign investors to india 824803बिजनेस डेस्क। मुंबई 

कच्चे तेल की कीमत में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से चुनिंदा खरीदारी के चलते बिकवाली का दबाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार की धारणा में सुधार हुआ है। यह जानकारी विश्लेषकों की ओर से दी गई। पिछले नौ ट्रेडिंग दिनों (15 जून - 25 जून) के दौरान, एफआईआई ने कैश मार्केट में पांच दिन खरीदारी की, हालांकि यह खरीदारी सीमित मात्रा में थी। इससे विदेशी निवेशकों की तरफ से लगातार हो रही भारी बिकवाली अब खत्म होती दिख रही है। 

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियों में इस बदलाव के लिए दो बातें जिम्मेदार हैं। पहली, रुपया स्थिर हो गया है और 15 मई को डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से मजबूत भी हुआ है। अब रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 94.40 पर है। जब रुपया मजबूत हो रहा हो, तो एफपीआई के लिए बिकवाली करना समझदारी नहीं है। 

दूसरी बात, दक्षिण कोरियाई और ताइवानी बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव एफपीआई को इन बाजारों में बिकवाली करने के लिए मजबूर कर रहा है। उन्होंने कहा, एक दिन दक्षिण कोरियाई बाजार 8 प्रतिशत गिर गया, जिससे ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इससे भारी मुनाफा कमाने वाले एफपीआई दक्षिण कोरिया और ताइवान में बिकवाली कर रहे हैं। 

यह एफआईआई को भारत में कम कमाई के बावजूद फिर से निवेश करने पर विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना भारत के लिए बहुत अच्छी बात है। भारत जिस बैलेंस ऑफ पेमेंट्स संकट का सामना कर रहा था, वह अब खत्म हो चुका है। इस कारण यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि लगातार एफपीआई बिकवाली का दौर खत्म हो गया है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि एफपीआई को भारत में लगातार खरीदार बनने में कुछ समय लग सकता है। 

भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर उम्मीदों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जबकि बीच-बीच में पैसे निकलने के बाद चुनिंदा एफआईआई की खरीदारी लौटने से बाजार का भरोसा बढ़ा। 

रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा कि व्यापक घरेलू आर्थिक संकेतों में सुस्ती और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेश का एक अनुशासित और शेयर विशिष्ट तरीका अपनाने की जरूरत है। 

उन्होंने आगे कहा कि ग्लोबल स्तर पर, कच्चे तेल की कीमतों का ट्रेंड, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और एफआईआई के निवेश का ट्रेंड बाजार के सेंटीमेंट को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे। भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट पर हो रही प्रगति पर भी करीबी नजर रखी जाएगी। -आईएएनएस

[@ ऑडी से भी महंगी है ये भैंस, देती है 29 लीटर दूध]


[@ यह उपाय करने से शांत होंगे शनि दोष]


[@ क्या आप जानते है खांसी का इलाज है चॉकलेट!]