एथेनॉल सेक्टर में मक्के की जबर्दस्त लिवाली से मंडियों में उछाल: डेढ़ माह में ₹300 तक चढ़े भाव
Source : business.khaskhabar.com | Oct 29, 2026 | 

बिजनेस डेस्क। जयपुर केंद्र सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) कार्यक्रम को गति मिलने के बाद से घरेलू अनाज मंडियों में मक्के की औद्योगिक मांग में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। एथेनॉल निर्माण इकाइयों में कच्चे माल के रूप में गन्ने की चीनी और अतिरिक्त चावल की सीमित उपलब्धता के चलते डिस्टिलरीज का पूरा ध्यान अब मक्के की खरीद पर टिक गया है।
बड़े पैमाने पर हो रही इस संस्थागत खरीद के कारण बीते महज डेढ़ माह के भीतर मक्के की कीमतों में प्रति क्विंटल 300 रुपये तक का जोरदार उछाल दर्ज किया गया है।
राजधानी जयपुर की थोक कृषि उपज मंडी में गुरुवार को मक्के के भाव उछलकर 2825 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गए।
स्थानीय कूकरखेड़ा अनाज मंडी स्थित फर्म माहेश्वरी एंड कंपनी के संचालक विजय माहेश्वरी के अनुसार, प्रमुख उत्पादक राज्यों में खरीफ सीजन के दौरान मानसूनी बारिश की बेरुखी से कुल पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उत्पादन में आई इस गिरावट के बीच केवल एथेनॉल उद्योग ही नहीं, बल्कि पोल्ट्री (मुर्गी दाना) सेक्टर, पशु आहार निर्माताओं और स्टार्च प्रोसेसिंग इकाइयों की ओर से भी लगातार चौतरफा खरीद निकल रही है।
जानकारों के मुताबिक, मंडियों में पहुंच रही कुल आवक का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे स्टॉकिस्टों और प्रसंस्करण इकाइयों के गोदामों में जा रहा है, जिससे खुले बाजार में सामान्य कामकाज के लिए माल की तंगी बनी हुई है। अंतरराज्यीय व्यापार की बात करें तो बिहार मूल की मक्का के सौदे हरियाणा डिलीवरी के आधार पर 3150 रुपये प्रति क्विंटल के ऊंचे स्तरों पर बोले जा रहे हैं।
दूसरी ओर, राजस्थान के प्रमुख उत्पादक बेल्ट चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, कोटा और बारां की मंडियों में इन दिनों रोजाना करीब 5 लाख बोरियों की भारी आवक दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद हाजिर बाजार में मजबूत खपत, पड़ोसी मुल्कों नेपाल और बांग्लादेश को जारी नियमित निर्यात तथा सीमित फ्री-फ्लोट स्टॉक के चलते कीमतें लगातार तेज बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने विपणन वर्ष 2026-27 के लिए मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है, जबकि खुले बाजार में जिंस 400 से 740 रुपये प्रति क्विंटल के भारी प्रीमियम पर बिक रही है। कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल पॉलिसी के कड़े लक्ष्यों और बहुआयामी खपत को देखते हुए आने वाले दिनों में मक्के के भावों में तेजी का यह रुख और मजबूत हो सकता है।
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