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19 सेवा उप-क्षेत्रों में से 14 में अप्रैल में दर्ज की गई दोहरे अंकों की वृद्धि: केंद्र

Source : business.khaskhabar.com | July 14, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 14 out of 19 service sub sectors recorded double digit growth in april centre 828730नई दिल्ली। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा मंगलवार को जारी ट्रायल इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी) के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूत तेजी देखने को मिली है। अप्रैल 2026 में 19 सेवा उप-क्षेत्रों में से 14 ने अप्रैल 2025 की तुलना में दोहरे अंकों (डबल डिजिट) की वृद्धि दर्ज की है। इस सूचकांक का आधार वर्ष 2024-25 रखा गया है। 

मंत्रालय ने बताया कि लगभग सभी सेवा श्रेणियों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। इन 19 उप-क्षेत्रों की हिस्सेदारी देश के कुल सेवा क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत है। मंत्रालय के अनुसार, यह पहली बार है जब सेवा क्षेत्र की मासिक गतिविधियों का इतने विस्तृत स्तर पर आकलन किया गया है।

अप्रैल 2026 में सबसे अधिक वृद्धि आवास एवं खानपान क्षेत्र में दर्ज की गई, जहां उत्पादन में 37.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद खुदरा व्यापार में 30.8 प्रतिशत, प्रशासनिक एवं सहयोगी सेवाओं में 28.7 प्रतिशत तथा रियल एस्टेट क्षेत्र में 27.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

मंत्रालय ने कहा कि उप-क्षेत्रीय इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी) पहली बार भारत के औपचारिक सेवा क्षेत्र की अल्पकालिक मासिक गतिविधियों का आकलन उपलब्ध कराएगा। फिलहाल इसकी कवरेज करीब 60 प्रतिशत है। भविष्य में उप-क्षेत्रीय सूचकांकों की स्थिरता और विश्वसनीयता का अध्ययन करने के बाद समग्र ओवरऑल आईएसपी भी जारी किया जाएगा।

मंत्रालय ने कहा कि 19 सेवा उप-क्षेत्रों के लिए आधार वर्ष 2024-25 के साथ आईएसपी जारी करना भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सेवा क्षेत्र देश की कुल आर्थिक गतिविधियों में आधे से अधिक का योगदान देता है, इसलिए इसकी सटीक और नियमित निगरानी बेहद अहम है।

मंत्रालय ने बताया कि मई 2025 में गठित टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी ऑन इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (टीएसी-आईएसपी) ने इस सूचकांक को तैयार करने की अवधारणा और कार्यप्रणाली विकसित की। इस समिति में शिक्षाविदों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित विभागों के अधिकारी भी शामिल थे।

मंत्रालय के अनुसार, यह सूचकांक मुख्य रूप से जीएसटी और प्रशासनिक आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए इसमें केवल औपचारिक क्षेत्र की कंपनियों को शामिल किया गया है। सरकारी गतिविधियां, गैर-बाजार सेवाएं तथा असंगठित क्षेत्र से जुड़ी सेवाएं फिलहाल इस सूचकांक का हिस्सा नहीं हैं।

मंत्रालय ने बताया कि हवाई परिवहन, रेलवे, माल ढुलाई वाला जल परिवहन, बैंकिंग और बीमा जैसे क्षेत्रों के लिए प्रशासनिक और द्वितीयक आंकड़ों का उपयोग किया गया है। वहीं थोक व्यापार, खुदरा व्यापार, रिपेयर एवं मेंटेनेंस, आवास एवं खानपान, सड़क परिवहन, यात्री जल परिवहन, वेयरहाउसिंग, डाक एवं कूरियर, दूरसंचार, सूचना एवं प्रसारण, रियल एस्टेट, आईटी एवं कंप्यूटर सेवाएं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी सेवाएं, प्रशासनिक सेवाएं तथा कला एवं मनोरंजन जैसे क्षेत्रों के लिए जीएसटी डेटा का उपयोग किया गया है।

मंत्रालय ने बताया कि सूचकांक तैयार करते समय कीमतों में बदलाव के प्रभाव को समायोजित करने के लिए विभिन्न डिफ्लेटर का इस्तेमाल किया गया। थोक व्यापार के लिए थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) का उपयोग किया गया, जबकि अन्य अधिकांश क्षेत्रों के लिए संबंधित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) या उसके सबसे उपयुक्त विकल्प को अपनाया गया। रिपेयर एवं मेंटेनेंस, बैंकिंग और बीमा क्षेत्रों के लिए सामान्य सीपीआई का इस्तेमाल किया गया, जबकि जिन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त श्रेणी उपलब्ध नहीं थी, वहां सीपीआई-सर्विसेज को आधार बनाया गया।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मासिक इंडेक्स ऑफ सर्विसेज प्रोडक्शन (आईएसपी) को प्रायोगिक आधार पर प्रकाशित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आंकड़ों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता का परीक्षण करना तथा विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव प्राप्त करना है, ताकि भविष्य में इसे और अधिक व्यापक तथा सटीक बनाया जा सके।

--आईएएनएस

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