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सरकार पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में अस्थिरता को कम करने के लिए ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र पर कर रही विचार

Source : business.khaskhabar.com | Apr 15, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 government considers fuel price stabilization mechanism to mitigate volatility in petrol diesel and lpg prices 806329नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के चलते केंद्र सरकार ईंधन मूल्य स्थिरीकरण तंत्र पर विचार कर रही है। इसके जरिए सरकार की कोशिश पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाना है।  
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव, जिस पर वर्तमान में प्रमुख मंत्रालयों के बीच चर्चा चल रही है, एक समर्पित बफर प्रणाली स्थापित करने का प्रयास करता है जिसे कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की अवधि के दौरान लागू किया जा सकेगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करना जारी रखे हुए है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित ढांचा कृषि उत्पादों के लिए मौजूदा मूल्य स्थिरीकरण प्रणाली पर आधारित होने की संभावना है।
इस प्रणाली के तहत, कीमतों में अचानक वृद्धि होने पर अस्थिरता को कम करने के लिए बफर स्टॉक बाजार में जारी किए जाते हैं।
ईंधन के लिए भी इसी तरह की प्रणाली पर विचार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक मूल्य झटकों के सीधे और पूर्ण प्रभाव को उपभोक्ताओं तक पहुंचने देने के बजाय, अचानक कीमतों में होने वाली वृद्धि से उन्हें बचाना है।
इस योजना में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को कवर करने वाला एक अलग ईंधन बफर फंड स्थापित करना शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह व्यवस्था भारत के रणनीतिक कच्चे तेल भंडार से अलग होगी, जिसका मुख्य उद्देश्य गंभीर व्यवधानों के दौरान आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि मूल्य उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना।
निधि की संरचना और हस्तक्षेप के मानदंडों के संबंध में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और अन्य विभागों के बीच विचार-विमर्श जारी है।
इन मानदंडों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों या अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता संकेतकों से जुड़े पूर्वनिर्धारित सीमाएं शामिल हो सकती हैं।
रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इसका उद्देश्य स्थायी सब्सिडी व्यवस्था लागू करना नहीं है, बल्कि अत्यधिक अस्थिरता को कम करना और संकट के समय घरेलू खपत की रक्षा करना है।
इस व्यवस्था के तहत कोई भी हस्तक्षेप अस्थायी और सीमित होगा, और मूल्य स्थितियों के स्थिर होने पर बफर को फिर से भर दिया जाएगा।
--आईएएनएस  

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