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मारुति सुजुकी ने गुजरात में शुरू किया चौथा प्लांट, अब एक ही परिसर में हर साल बनेंगे 10 लाख वाहन; सबसे पहले बनेगी इलेक्ट्रिक ई विटारा 

Source : business.khaskhabar.com | July 31, 2026 | businesskhaskhabar.com Automobile News Rss Feeds
 maruti suzuki launches fourth plant in gujarat annual capacity at single complex reaches 1 million vehicles electric e vitara to be produced first 832833नई दिल्ली । मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने गुरुवार को गुजरात के हंसलपुर स्थित अपने चौथे विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया। इसके साथ ही इस परिसर की वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 10 लाख (1 मिलियन) वाहन हो गई है। यह अब एक ही स्थान पर भारत का सबसे बड़ा यात्री वाहन निर्माण केंद्र बन गया है। 
नए प्लांट के शुरू होने से हंसलपुर संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 7.5 लाख यूनिट से बढ़कर 10 लाख यूनिट हो गई है।
कंपनी के अनुसार, चौथे प्लांट के शुरू होने के साथ हंसलपुर, सुजुकी का दुनिया का पहला ऐसा मैन्युफैक्चरिंग परिसर बन गया है, जहां एक ही स्थान पर हर साल 10 लाख वाहन बनाए जा सकते हैं।
इसके साथ ही यह भारत का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन पैसेंजर व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स भी बन गया है।
नए प्लांट के चालू होने के बाद मारुति सुजुकी की पूरे भारत में कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़कर 29 लाख (2.9 मिलियन) वाहन हो गई है।
कंपनी ने हंसलपुर परियोजना में अब तक 25,288.7 करोड़ रुपए का कुल निवेश किया है, जिनमें से नए प्लांट पर ही करीब 3,900 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं।
नए प्लांट में शुरुआत में कंपनी अपनी पहली बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (बीईवी) 'ई-विटारा' का उत्पादन करेगी। इसके जरिए मारुति सुजुकी भारत के इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहन बाजार में अपनी मजबूत शुरुआत करने जा रही है।
हंसलपुर संयंत्र में फिलहाल फ्रॉन्क्स, बलेनो, स्विफ्ट और ई-विटारा जैसे मॉडल बनाए जाते हैं।
हंसलपुर प्लांट कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट हब भी बन चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी के कुल वाहन निर्यात का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा इसी संयंत्र से किया गया।
मारुति सुजुकी ने गुजरात प्लांट में टिकाऊ लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा दिया है। कंपनी ने प्रधानमंत्री गतिशक्ति कार्यक्रम के तहत मार्च 2024 में हंसलपुर संयंत्र में भारत की पहली इन-प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की थी।
हालांकि, रेलवे के माध्यम से वाहनों की ढुलाई मार्च 2023 से शुरू हो चुकी थी। तब से अब तक कंपनी 7.5 लाख से अधिक वाहनों को रेल नेटवर्क के जरिए भेज चुकी है, जिससे कार्बन उत्सर्जन, ईंधन की खपत और सड़क पर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिली है।
फरवरी 2026 में हंसलपुर की इन-प्लांट रेलवे साइडिंग को वेरा के सत्यापित कार्बन मानक (वीसीएस) कार्यक्रम के तहत दुनिया की पहली मोडल शिफ्ट परिवहन परियोजना के रूप में पंजीकृत किया गया। यह सम्मान परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने में परियोजना के योगदान के लिए दिया गया।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मारुति सुजुकी गुजरात में कौशल विकास पर भी निवेश कर रही है। कंपनी ने भारत और जापान सरकार के सहयोग से मेहसाणा और गांधीनगर में दो जापान-भारत विनिर्माण संस्थान (जेआईएम) स्थापित किए हैं।
इन संस्थानों में अब तक 1,200 से अधिक छात्रों को ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
 

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