देश में तेजी से विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम; डिजाइनिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग के साथ सप्लाई चेन के विकास पर भी फोकस
Source : business.khaskhabar.com | Sep 15, 2026 | 

नई दिल्ली । देश में तेजी से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित हो रहा है। इसमें चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों के साथ-साथ उनकी डिजाइनिंग, पैकेजिंग, टेस्टिंग, उपकरण, सप्लाई चेन और उनसे जुड़े दूसरे उद्योगों पर भी फोकस किया जा रहा है। यह जानकारी सेमीकॉन इंडिया 2026 के शुरू होने से पहले जारी की गई सरकारी फैक्टशीट में दी गई, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 17 सितंबर को किया जाएगा।
इस साल इस साल सेमीकॉन इंडिया की थीम “सिलिकॉन से सिस्टम तक: पूरा इकोसिस्टम बनाना है।"
द्वारका स्थित यशोभूमि में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में दुनिया की बड़ी चिप कंपनियों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता और निवेशक भी वहां मौजूद होंगे।
देश ने बीते कुछ वर्षों में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने में तेजी से प्रगति की है। इसके लिए 2021 में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम लाया गया था। इसकी रणनीति सिर्फ दिखावे के लिए कोई एक चिप फैक्ट्री खड़ी करना नहीं, बल्कि पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है।
सेमीकॉन 1.0 के लिए 76,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। इसमें चिप डिजाइन और निर्माण से लेकर पैकेजिंग, टेस्टिंग, मशीनरी, कच्चे माल और कुशल कर्मचारियों तक पूरी वैल्यू चेन को शामिल किया गया।
जुलाई 2026 में सरकार ने सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी। इसके तहत 1.27 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसका आधार छह प्रमुख क्षेत्रों पर है, चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनरी और सामग्री, चिप बनाने की फैक्ट्रियां, आधुनिक पैकेजिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट, कुशल प्रतिभाओं का विकास है।
जमीन पर हो रहा काम भी सेमीकॉन की सफलता की पुष्टि करता है। अब तक छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है।
इन परियोजनाओं में सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट, डिस्प्ले निर्माण और आधुनिक पैकेजिंग जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से तीन संयंत्रों में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है।
यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसका मतलब है कि भारत की सेमीकंडक्टर नीति अब सिर्फ कागज पर नहीं है, बल्कि चिप निर्माण वास्तव में जमीन पर शुरू हो चुका है।
इसके अलावा, सरकार ने ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम के तहत इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) के सॉफ्टवेयर और उपकरण अब तक 320 शैक्षणिक संस्थानों में उपलब्ध कराए हैं। अभी तक 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
वहीं, 24 सेमीकंडक्टर डिजाइन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता के लिए मंजूरी मिली है। डीएलआई योजना के तहत 105 स्टार्टअप और छोटे-मझोले उद्यमों को भी ईडीए टूल्स के लिए सहायता दी गई है।
फैक्टशीट में बताया गया कि अप्रैल 2026 तक 75 संस्थानों ने 211 चिप डिजाइन तैयार करके उत्पादन के अगले चरण यानी ‘टेप-आउट’ तक पहुंचाए थे। यह इस बात का संकेत है कि भारत में चिप डिजाइन की क्षमता अब कुछ चुनिंदा बड़े संस्थानों तक सीमित नहीं रही है।
देश के हर हिस्से में चिप डिजाइन की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए डी-डीएसी में ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ (सी2एस) कार्यक्रम और ‘डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव’ (डीएलआई) योजना के तहत चिपइन सेंटर बनाया गया है।
यह एक राष्ट्रीय स्तर की साझा सुविधा है। यहां इंजीनियरों और संस्थानों को आधुनिक चिप डिजाइन टूल्स, चिप निर्माण की सेवाओं और विशेष प्रशिक्षण की सुविधा मिलती है।
चिपइन सेंटर की इन सुविधाओं का लाभ 500 से अधिक संस्थानों के 1 लाख से ज्यादा इंजीनियर उठा चुके हैं। इनमें 400 शैक्षणिक संस्थान और 100 स्टार्टअप शामिल हैं।
इन संस्थानों ने मिलकर 300 से ज्यादा चिप डिजाइन तैयार किए हैं। इन चिप्स को मोहाली स्थित एससीएल और विदेशों की आधुनिक चिप फैक्ट्रियों में बनाने के लिए भेजा गया है।
--आईएएनएस
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