businesskhaskhabar.com

Business News

Home >> Business

खाद्य महंगाई बढ़ने से सीपीआई में हुई बढ़ोतरी, मौसम और तेल की कीमतों से आगे भी जोखिम की संभावना: इकोनॉमिस्ट्स

Source : business.khaskhabar.com | Sep 15, 2026 | businesskhaskhabar.com Commodity News Rss Feeds
 rising food inflation drives up cpi economists warn of continued risks from weather and oil prices 844802नई दिल्ली । केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने सोमवार को कहा कि जुलाई में 4.5 प्रतिशत रहने वाली खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई। इसके पीछे मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि महंगाई का आउटलुक अभी भी मौसम संबंधी जोखिमों और बाहरी कारकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। 
रजनी सिन्हा के अनुसार, कोर महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.2 प्रतिशत थी। हालांकि कीमती धातुओं को छोड़कर कोर महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही और 3.3 प्रतिशत के स्तर पर बनी रही। मुख्य महंगाई दर में बढ़ोतरी का कारण चीनी, चावल, खाद्य तेल और प्याज जैसी कुछ सब्जियों की कीमतों में वृद्धि रही।
उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) में सालाना आधार पर 4.82 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। खाद्य महंगाई जुलाई के 5.52 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 5.66 प्रतिशत हो गई, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 6.13 प्रतिशत रही।
प्रमुख खाद्य वस्तुओं में अदरक, प्याज और लहसुन की कीमतों में क्रमशः 73.82 प्रतिशत, 48.27 प्रतिशत और 43.60 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि टमाटर और आलू की कीमतों में राहत देखने को मिली। अगस्त के दौरान टमाटर 31.09 प्रतिशत और आलू 13.14 प्रतिशत सस्ता हुआ।
सिन्हा ने कहा कि देर से आए मानसून के कारण प्याज की नई फसल की बुवाई प्रभावित हुई है, जिससे बाजार में नई फसल की आवक में देरी हुई और कीमतों पर दबाव बना। वहीं, गन्ने की अपेक्षा से कम पैदावार और एथेनॉल उत्पादन की ओर बढ़ते रुझान के कारण घरेलू उपलब्धता कम हुई है, जिससे चीनी की कीमतों पर असर पड़ा है।
खाद्य कीमतों में वृद्धि का असर खाद्य एवं पेय उद्योग की लागत पर भी पड़ रहा है। पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, रेस्तरां और अन्य संबंधित सेवाओं पर लागत का दबाव और बढ़ सकता है।
अगस्त में व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा तथा विविध वस्तु एवं सेवा श्रेणी में भी महंगाई ऊंचे स्तर पर रही और यह 15.21 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण सोना और चांदी की वैश्विक कीमतों में तेजी के चलते आभूषणों के दाम बढ़ना रहा। इस दौरान चांदी के आभूषणों की कीमतों में 107.11 प्रतिशत और सोना, हीरा एवं प्लैटिनम आभूषणों की कीमतों में 35.53 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
वहीं, पीएचडीसीसीआई के महासचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रणजीत मेहता ने कहा कि कीमती धातुओं की लगातार ऊंची कीमतें आगामी त्योहारी और शादी-ब्याह के सीजन के दौरान मांग को प्रभावित कर सकती हैं।
केयरएज रेटिंग्स का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है और पूरे वित्त वर्ष में इसका औसत लगभग 5 प्रतिशत रह सकता है। मौद्रिक नीति के संबंध में रजनी सिन्हा ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति आगे भी आंकड़ों के आधार पर फैसले लेगी और उसके निर्णय महंगाई तथा आर्थिक वृद्धि की बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।
उन्होंने कहा, "यदि महंगाई में लगातार बढ़ोतरी बनी रहती है तो आने वाले महीनों में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना मजबूत हो सकती है।"
उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर में होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा पर बाजार की विशेष नजर रहेगी, क्योंकि दुनिया के कई प्रमुख केंद्रीय बैंक पहले ही सख्त मौद्रिक नीति की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं।
--आईएएनएस
 

[@ झील के पानी में हाथ डालते ही उठने लगी आग की लपटे!]


[@ केसर स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी]


[@ शाम को ना करें ये काम, वरना हो जाएंगे कंगाल]