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भारत-मोरक्को ट्रेड 4.2 अरब डॉलर पहुंचा, राजदूत मलिकी बोले- भविष्य की संभावनाएं बेहद उज्ज्वल

Source : business.khaskhabar.com | Oct 30, 2026 | businesskhaskhabar.com Business News Rss Feeds
 india morocco trade reaches $42 billion ambassador maliki says future prospects are very bright 857344नई दिल्ली । भारत में मोरक्को के राजदूत मोहम्मद मलिकी ने भारत-मोरक्को संबंधों, बढ़ते व्यापार और रक्षा सहयोग पर आईएएनएस के साथ विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि 2015 में दोनों देशों के बीच व्यापार 1 से 1.2 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 4.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। मोरक्को में भारतीय कंपनियों की संख्या भी 13 से बढ़कर 47 हो गई है। 
सवाल: आने वाले दिनों में भारत और मोरक्को के द्विपक्षीय संबंधों को आप किस रूप में देखते हैं?
जवाब: मेरा मानना है कि भविष्य की बात करना, अब तक किए गए कार्यों की चर्चा करना भी है। हमारे संबंधों ने एक लंबा और सकारात्मक सफर तय किया है, विशेषकर राजा मोहम्मद VI की यात्रा के बाद। यदि मैं थोड़ा पीछे जाऊं, तो 2001 में राजा मोहम्मद VI की एशिया की पहली यात्रा भारत की थी। तभी से मोरक्को के सर्वोच्च नेतृत्व ने भारत के साथ घनिष्ठ सहयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया, जिसने हमारे द्विपक्षीय संबंधों की मजबूत नींव रखी। 2015 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 1 से 1.2 अरब डॉलर था। मुझे खुशी है कि पिछले वर्ष यह बढ़कर लगभग 4.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह उल्लेखनीय वृद्धि हमारे संबंधों की सफलता को दर्शाती है। दोनों देशों ने हमेशा व्यापारिक संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दिया है। भविष्य की संभावनाएं बेहद उज्ज्वल हैं, क्योंकि भारत एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है और मोरक्को भी पूरे अफ्रीका में एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र है। इससे दोनों देशों पर विशेष जिम्मेदारी आती है और कम समय में हासिल की गई इस प्रगति पर गर्व भी होता है। मोरक्को ऑटोमोबाइल उद्योग में अफ्रीका और अरब जगत में अग्रणी है, एयरोनॉटिक्स क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है और अब रक्षा क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। यही वे क्षेत्र हैं जो भारत और मोरक्को के बीच सहयोग और निवेश की नई संभावनाएं प्रस्तुत करते हैं। भारतीय उद्योग जगत यह समझ चुका है कि मोरक्को उनके विनिर्माण और वैश्विक विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। इसका प्रमुख कारण विभिन्न देशों के साथ मोरक्को के मुक्त व्यापार समझौते हैं। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण व्यापारिक गतिविधियों की गति कुछ धीमी हो सकती है, लेकिन यह कोई संरचनात्मक गिरावट नहीं है। दोनों देशों में व्यापार और निवेश को नए क्षेत्रों में विस्तारित करने की पूरी क्षमता मौजूद है। कार के पुर्जों, स्पेयर पार्ट्स, दवाइयों और कृषि उत्पादों सहित विभिन्न वस्तुओं का व्यापार लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच एक्सचेंज लगातार विस्तृत हो रहा है और दोनों पक्ष इसे और व्यापक बनाना चाहते हैं।
सवाल: मोरक्को अफ्रीका और यूरोप का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। भारत मोरक्को को मित्र और प्रवेशद्वार के रूप में कैसे इस्तेमाल कर सकता है?
जवाब: हमें अपनी भौगोलिक स्थिति का विशेष लाभ प्राप्त है। मोरक्को केवल यूरोप और अफ्रीका के निकट स्थित नहीं है, बल्कि यह अरब जगत का पश्चिमी छोर भी है और उत्तरी अमेरिका के सबसे निकट स्थित देशों में से एक है। उदाहरण के लिए, कासाब्लांका अफ्रीका से न्यूयॉर्क और कनाडा के सबसे निकटतम प्रमुख शहरों में शामिल है। महामहिम की यात्रा के समय मोरक्को में लगभग 12 से 13 भारतीय कंपनियां सक्रिय थीं। आज कम से कम 47 भारतीय कंपनियां सीधे निवेश कर रही हैं और 200 से अधिक कंपनियों की अप्रत्यक्ष उपस्थिति है। शुरुआत में स्थानीय व्यापारिक समुदाय को यह समझाना चुनौतीपूर्ण था कि मोरक्को उनके व्यापार विस्तार के लिए उपयुक्त मंच है, लेकिन समय के साथ उन्होंने स्वयं इसकी संभावनाओं को पहचाना। यहां का निवेश वातावरण, बुनियादी ढांचा और वैश्विक संपर्क व्यवस्था बेहद मजबूत है। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में टैंजियर मेड बंदरगाह अफ्रीका और भूमध्यसागर का अग्रणी बंदरगाह माना जाता है। हम विशेषीकृत बंदरगाहों का भी विकास कर रहे हैं, जिससे हमारी लॉजिस्टिक क्षमता और मजबूत हुई है। भारत की विशेष रुचि अफ्रीका, विशेषकर पश्चिमी और फ्रांसीसी भाषा-भाषी अफ्रीकी देशों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने में है। इस दिशा में मोरक्को भारतीय कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार और प्रवेशद्वार साबित हो सकता है। दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। इसलिए संयुक्त उपक्रमों और साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक दक्षिण के विकास को नई गति दी जा सकती है। इससे भारत और अफ्रीका के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
सवाल: भारत और मोरक्को के बीच व्यापारिक संबंधों की बात करें, तो पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर आपका क्या आकलन है?
जवाब: यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मध्य पूर्व आज एक गंभीर संकट से गुजर रहा है। विशेष रूप से समुद्री व्यापार और जहाजों की निर्बाध आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत और मोरक्को उन देशों में शामिल हैं, जिन्होंने ऊर्जा सहित विभिन्न वस्तुओं और उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति और परिवहन की आवश्यकता पर लगातार जोर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों के कारण व्यापारिक प्रवाह धीमा हुआ है और यही कारण है कि व्यापार में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। यह कमी हमारी इच्छा के कारण नहीं, बल्कि परिस्थितियों के कारण हो रही है। अफ्रीका के दक्षिणी मार्ग से होकर व्यापारिक जहाजों का आवागमन अधिक महंगा, समय लेने वाला और चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इससे वस्तुओं की समय पर आपूर्ति भी प्रभावित होती है। मेरा मानना है कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान हथियारों से नहीं निकलता। सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर आना होगा और राजनीतिक समाधान तलाशना होगा। मोरक्को ने हमेशा अपने रणनीतिक साझेदार देशों, विशेष रूप से खाड़ी देशों और सऊदी अरब के साथ एकजुटता व्यक्त की है। हम क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। भारत इस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वैश्विक दक्षिण में उसकी विश्वसनीयता है और उसके सभी प्रमुख पक्षों के साथ सकारात्मक संबंध हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व में भारतीय समुदाय की बड़ी उपस्थिति भी भारत की विशेष रुचि और जिम्मेदारी को दर्शाती है। मेरा विश्वास है कि भारत और मोरक्को मिलकर संवाद को बढ़ावा देने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।
--आईएएनएस

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