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वैश्विक दबाव के बीच सपाट खुला बाजार, सेंसेक्स में 200 अंकों से ज्यादा की बढ़त

Source : business.khaskhabar.com | Oct 30, 2026 | businesskhaskhabar.com Market News Rss Feeds
 market opens flat amid global pressure sensex gains over 200 points 857342मुंबई । कमजोर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनावों को लेकर नई चिंताओं के बीच हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ सपाट खुला। 
बाजार खुलने पर बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,151.04 के मुकाबले 48.65 अंक चढ़कर 74,199.69 पर खुला, तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 27.75 अंक या 0.12 प्रतिशत चढ़कर 22,964.50 पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 22,936.75 पर बंद हुआ था।
वहीं, दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 0.27 प्रतिशत यानी 206.51 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 74,357.55 का उच्चतम स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 0.25 प्रतिशत की तेजी दर्ज करते हुए 22,994.70 का उच्चतम स्तर छुआ।
इस दौरान, निफ्टी 50 इंडेक्स में ट्रेंट में सबसे ज्यादा 5.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद इंडिगो, सन फार्मा, इंफोसिस, इटरनल और टीसीएस के शेयरों का स्थान रहा। इसके विपरीत, कोल इंडिया, बीईएल और श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में क्रमशः 0.54 प्रतिशत और 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी देखी गई, जबकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी में भी गिरावट देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते खर्च को लेकर चिंताओं ने वैश्विक निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है। यही कारण है कि एशियाई बाजारों में भी दबाव बना हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली हाल के दिनों में कम हुई है और बीच-बीच में खरीदारी भी देखने को मिली है, लेकिन मौजूदा बाजार संरचना अभी भी बड़ी तेजी के लिए अनुकूल नहीं दिखती।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले सप्ताह मार्जिन फंडिंग पर आधारित लंबी पोजिशनों की जबरन बिकवाली के बाद स्मॉलकैप शेयरों में तेज गिरावट आई थी। अब उसी सेगमेंट में कुछ रिकवरी दिखाई दे रही है, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) और खुदरा निवेशक उच्च वैल्यूएशन के बावजूद चुनिंदा ग्रोथ स्टॉक्स में खरीदारी कर रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे लार्जकैप शेयरों पर भी नजर रखें, क्योंकि एफआईआई बिकवाली के कारण कई मजबूत कंपनियों के शेयर आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हो गए हैं और वहां वैल्यू-बायिंग के अवसर बन रहे हैं।
गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 943 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की थी, जिससे उनकी लगातार दो सत्रों की खरीदारी का सिलसिला टूट गया। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार दूसरे दिन खरीदारी जारी रखते हुए 1,924 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी बनी हुई है। अमेरिका में प्रमुख टेक कंपनियों के अपेक्षा से कमजोर नतीजों के बाद एआई आधारित निवेश थीम को लेकर उत्साह कुछ कम हुआ है। वहीं फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के एक दिन बाद अमेरिकी बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुए।
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 113.96 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 104.99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
--आईएएनएस

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